हमारे बारे में
"अंगिरा ज्योतिष आपका हार्दिक स्वागत करता है"
पं. ललित शर्मा
संचालक, अंगिरा ज्योतिष
हमने लगभग पिछले तीस वर्षों में ज्योतिष में अद्वितीय ख्याति, सम्मान तथा विश्वास प्राप्त किया है। शास्त्र कहते हैं कि विद्या अर्थात ज्ञान समस्याओं से मुक्ति, भय-मुक्ति, आत्म-संतुष्टि और आत्मविश्वास की पूर्ति करता है। हम परंपरागत वैदिक ज्योतिष तथा दक्षिण भारतीय ज्योतिष कृष्णमूर्ति पद्धति के द्वारा आपकी मानसिक, शारीरिक तथा भौतिक समस्याओं से मुक्ति हेतु अद्वितीय ज्योतिषीय परामर्श एंव उपचार सेवा प्रदान करते हैं, हमारे ज्योतिषीय मार्गदर्शन तथा उपायों से आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
हम ज्योतिषीय फ़लादेश व परामर्श प्रदान करने हेतु ज्योतिष जगत की अद्वितीय, सटीक, आश्चर्यजनक-व्यवहारिक विश्लेषण तथा भविष्य में घटने वाली घटनाओं की पूर्व जानकारी प्रदान करने वाली सैद्धान्तिक तथा पूर्ण ज्योतिषीय पद्धति का प्रयोग करते हैं। यह पद्धति परंपरागत वैदिक ज्योतिषीय तथा कृष्णमूर्ति पद्धति के सिद्धन्तों के संयोजन तथा समन्वय पर आधारित एक आधुनिक्रत ज्योतिष पद्धति है।
"अंगिरा ज्योतिष"
हम आपके जीवन के विभिन्न विषयों, घटनाओं तथा समस्याओं पर व्यक्तिगत चर्चा कर आपको परामर्श सेवा प्रदान करते हैं, अद्वितीय ज्योतिषीय विश्लेषण तथा उपचारीय परामर्श जिसके परिणाम स्वरूप आपके जीवन की समस्त बाधाएं तथा समस्याएं समाप्त होती हैं तथा आपके जीवन के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों तथा उपलब्धियों की प्राप्ति होती है तथा अंगिरा ज्योतिष आपके दीर्ध जीवन, विश्वसनीय सेवाएँ, स्वास्थ्य समृद्धि के लिए कामना करते हैं।
- सटीक गणितीय गणना जन्म विवरण (Birth Details) के आधार पर ग्रहों, नक्षत्रों और उप-नक्षत्रों की गहराई से गणितीय गणना की जाती है।
- मूल कारण का विश्लेषण समस्या के बाहरी रूप को नहीं, बल्कि कुण्डली के सूक्ष्म अध्ययन से उसकी असली जड़ को पकड़ा जाता है।
- सरल और व्यावहारिक उपाय ऐसे उपाय बताना जो आम इंसान अपनी दिनचर्या में आसानी से कर सके, न कि ऐसे जो उस पर आर्थिक बोझ बढ़ा दें।
- सच्चा मार्गदर्शन वैदिक ज्योतिष के सच्चे और सटीक ज्ञान के माध्यम से लोगों के जीवन का अंधकार दूर करना हमारा परम उद्देश्य है।
- धरोहर का सम्मान हम इस पवित्र धरोहर और परंपरा को पूरी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाते हुए, भटके हुए लोगों को तार्किक मार्गदर्शन देना चाहते हैं।
- सही दिशा हमारा मुख्य लक्ष्य आपको आपके जीवन की वास्तविक दिशा और समस्याओं के वास्तविक कारणों से अवगत कराना है।
- अंधविश्वास का खात्मा समाज में ज्योतिष को लेकर फैले अंधविश्वास और डर को जड़ से खत्म करना।
- भरोसेमंद साथी 'अंगिरा ज्योतिष' को एक ऐसा भरोसेमंद साथी बनाना, जहाँ हर व्यक्ति बिना किसी झिझक के अपनी परेशानी साझा कर सके।
- राह दिखाना, डराना नहीं हम ज्योतिष को डराने का या पैसे ऐंठने का नहीं, बल्कि सही जीवन जीने की राह दिखाने का दिव्य माध्यम मानते हैं।
- सत्य और पारदर्शिता जो कुंडली में है, वही स्पष्ट बताना। झूठी उम्मीदें नहीं बाँधना।
- भयमुक्त मार्गदर्शन डराकर महँगे उपाय या पूजा-पाठ नहीं बेचना। ज्योतिष डराने के लिए नहीं, राह दिखाने के लिए है।
- पूर्ण गोपनीयता आपके जीवन की हर समस्या और दी गई जानकारी हमारे पास 100% सुरक्षित और गुप्त रहती है।
- निस्वार्थ सेवाभाव व्यवसाय से पहले लोगों की भलाई और उनकी समस्याओं का सटीक समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गुरु-परंपरा और प्रेरणा
ब्रह्मलीन ज्योतिष्मर्मज्ञ पं. बी. एल. शर्मा (1958–2026)
पं. बी. एल. शर्मा जी का जन्म सन् 1958 में राजस्थान की पावन धरा अजमेर में हुआ। ज्योतिष की विद्या उन्हें विरासत में प्राप्त हुई थी; बचपन से ही वे अपने पूज्य पिता स्व. श्री सूरज करण शर्मा जी के सानिध्य में वेदों, शास्त्रों और ज्योतिषीय रहस्यों का गहन अध्ययन करने लगे。
भारतीय रेल में अपनी राजकीय सेवाओं के दौरान भी उन्होंने अपनी आध्यात्मिक साधना को कभी विराम नहीं दिया। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद ज्योतिष उनके लिए केवल एक विषय नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली तपस्या रही। वर्ष 1998 में उन्होंने 'अंगिरा ज्योतिष' संस्थान की नींव रखी, जो आगे चलकर सटीक भविष्यवाणियों और अटूट विश्वास का केंद्र बना।
पिताजी ने परंपरागत वैदिक ज्योतिष के साथ-साथ कृष्णमूर्ति पद्धति (K.P. Astrology) में अद्वितीय महारत हासिल की। उनकी गणितीय गणनाएँ इतनी सूक्ष्म और तार्किक होती थीं कि उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियाँ अचूक सिद्ध होती थीं। इसके अतिरिक्त अंक ज्योतिष, लाल किताब और रत्न विज्ञान के माध्यम से उन्होंने हज़ारों पीड़ित मानवता का मार्गदर्शन किया।
उनका जीवन सरल, सात्विक और परोपकारी रहा। उन्होंने ज्योतिष को कभी व्यवसाय नहीं समझा, बल्कि इसे 'लोक-कल्याण' का एक पवित्र माध्यम माना। वर्ष 2026 में वे पंचतत्व में विलीन होकर शांत हुए, किंतु उनके द्वारा जलाया गया ज्ञान का यह दीपक आज भी उनके अनुयायियों, प्रशंसकों और हम परिवारजनों के जीवन में प्रेरणा और मार्गदर्शन बनकर सदैव प्रज्वलित रहेगा।
ब्रह्मलीन दादा श्री पंडित एस. के. शर्मा (1925-1999)
अंगिरा ज्योतिष की ज्ञान-परंपरा के मूल आधार स्तंभ, पंडित श्री सूरज करण शर्मा जी का जीवन भारतीय संस्कृति, वेदों और ज्योतिषीय साधना को समर्पित रहा। सन् 1925 में जन्मे पंडित जी अपने समय के अत्यंत प्रतिष्ठित और विद्वान ज्योतिषी थे, जिन्हें न केवल गणनाओं का सूक्ष्म ज्ञान था, बल्कि वे एक सिद्ध साधक भी थे。
उन्होंने कठिन परिश्रम और अटूट निष्ठा से ज्योतिष विद्या के उन रहस्यों को आत्मसात किया, जो समय के साथ लुप्त हो रहे थे। उनके पास आने वाला हर व्यक्ति न केवल अपनी समस्याओं का समाधान पाता था, बल्कि उनकी सादगी और आध्यात्मिक तेज से प्रभावित होकर आत्मिक शांति भी अनुभव करता था।
दादाजी का सबसे बड़ा योगदान ज्योतिष को एक 'संस्कार' के रूप में अपनी अगली पीढ़ी को सौंपना रहा। उन्होंने अपने पुत्र पं. बी. एल. शर्मा जी को बाल्यकाल से ही इस विद्या के गूढ़ सिद्धांतों में दीक्षित किया और उन्हें निस्वार्थ जनसेवा का मार्ग दिखाया। उनके द्वारा रोपा गया वह ज्ञान का छोटा सा बीज आज 'अंगिरा ज्योतिष' के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।
वर्ष 1999 में वे शांत हुए, परंतु उनकी शिक्षाएं, उनके आदर्श और उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा आज भी हमारे संस्थान की नींव में रची-बसी है। दादाजी का आशीर्वाद ही हमारी असली शक्ति है।
ब्रह्मलीन गुरुदेव श्री के.के. तोमर (1941-2010)
ब्रह्मलीन श्री के.के. तोमर ने प्रभावी रुप से कहा था कि सही समय पर सही सलाह आपके भविष्य को बदल सकती है और वर्तमान को अच्छा बना सकती है। श्री तोमर का जन्म सन् 1941 में अजमेर में हुआ था। वे भावनगर (गुजरात) में भारतीय रेल्वे की सेवा में थे तथा सन् 2001 में सेवानिवृत हुए। गुजरात के प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिष श्री दया शंकर त्रिवेदी से गत 35 वर्ष पूर्व ज्योतिष की शिक्षा ली। प्रारंभिक तौर पर उन्होंने पारंपरिक वैदिक ज्योतिष तथा जल्द ही दक्षिण भारतीय ज्योतिष विज्ञान कृष्णमूर्ति पद्धति को सीखा। इसके बाद 30 साल के कठिन अनुसंधान के बाद आप ने ज्योतिष विज्ञान में समर्पित रहते हुए भारत में प्रसिद्धि पाई एवं उनका नाम उच्च व्यक्तित्व के साथ लिया जाता है।
उन्होंने के.पी. पद्धति को भी बढ़ावा दिया जिसमें हस्त रेखा, वास्तु, नवग्रह रत्न धारण और अंक ज्योतिष में भी कार्य किया। उनके ज्योतिष व्याख़्यान् विभिन्न विषयों पर पत्रिकाओं तथा समाचार-पत्रों में अक्सर छपते रहते थे। इस क्रम में उन्होंने एक पुस्तक ‘‘रत्न गुड लक फॉर यू’’ भी लिखी जिससे मध्य भारत, गुजरात, राजस्थान एवं सम्पूर्ण भारत में उनकी सलाह से लोगों का काफी उद्धार हुआ। लोगों में ज्योतिष के प्रति आस्था एवं विश्वास का संचार हुआ और जनमानस को सहजता महसूस हुई।
सूरत (गुजरात) में एक संस्था ‘‘स्टैपिंग-स्टोन’’ की स्थापना की जिसमें ज्योतिष विज्ञान से संबंधित अनुसंधान, रत्नों की सलाह का प्रमुख केन्द्र रहा और श्री तोमर गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध हुए। सूरत (गुजरात) में सन् 2010 में उनका देहावसान हुआ।