ज्योतिष: अद्वैत का विज्ञान
ज्योतिष शायद सबसे पुराना विषय है और एक अर्थ में सबसे ज्यादा तिरस्कृत विषय भी है। सबसे पुराना इसलिए कि मनुष्य जाति के इतिहास की जितनी खोजबीन हो सकी, उसमें ऐसा कोई भी समय नहीं था जब ज्योतिष मौजूद न रहा हो। जीसस से पच्चीस हजार वर्ष पूर्व सुमेर में मिले हुए हड्डी के अवशेषों पर ज्योतिष के चिह्न अंकित हैं। पश्चिम में, पुरानी से पुरानी जो खोजबीन हुई है, वह जीसस से पच्चीस हजार वर्ष पूर्व इन हड्डियों की है, जिन पर ज्योतिष के चिह्न और चंद्र की यात्रा के चिह्न अंकित हैं। लेकिन भारत में तो बात और भी पुरानी है।
क्योंकि वेद में यदि पचानवे हजार वर्ष पहले जैसे नक्षत्रों की स्थिति थी, उसका उल्लेख है, तो वह उल्लेख इतना पुराना तो होगा ही। क्योंकि उस समय जो स्थिति थी नक्षत्रों की, उसे बाद में जानने का कोई भी उपाय नहीं था। अब जरूर हमारे पास ऐसे वैज्ञानिक साधन उपलब्ध हो सके हैं कि हम जान सकें कि अतीत में नक्षत्रों की स्थिति कब कैसी रही होगी।
ज्योतिष की सर्वाधिक गहरी मान्यताएं भारत में पैदा हुईं। सच तो यह है कि ज्योतिष के कारण ही गणित का जन्म हुआ। ज्योतिष की गणना के लिए ही सबसे पहले गणित का जन्म हुआ। इसलिए अंक गणित के जो अंक हैं, वह भारतीय हैं। सारी दुनिया की भाषाओं में एक से लेकर नौ तक जो गणना के अंक हैं, वे समस्त भाषाओं में जगत की, भारतीय हैं। और सारी दुनिया में नौ डिजिट (नौ अंक) स्वीकृत हो गए हैं। वे नौ अंक भारत में पैदा हुए और धीरे-धीरे सारे जगत में फैल गए। जिसे आप अंग्रेजी में 'नाइन' कहते हैं वह संस्कृत के 'नौ' का ही रूपांतरण है। जिसे आप 'एट' कहते हैं, वह संस्कृत के 'अष्ट' का ही रूपान्तरण है। एक से लेकर नौ तक जगत की समस्त सभ्य भाषाओं में गणित के नौ अंकों का जो प्रचलन है, वह भारतीय ज्योतिष के प्रभाव में ही हुआ है।
भारत से ज्योतिष की पहली किरणें सुमेर की सभ्यता में पहुंचीं। सुमेर वासियों ने सबसे पहले ईसा से छह हजार साल पूर्व पश्चिम के जगत के लिए ज्योतिष का द्वार खोला। सुमेर वासियों ने सबसे पहले नक्षत्रों के वैज्ञानिक अध्ययन की आधारशिलाएं रखीं। उन्होंने बड़े ऊंचे, सात सौ फीट ऊंचे मीनार बनाए और उन मीनारों पर सुमेर के पुरोहित चौबीस घण्टे आकाश का अध्ययन करते थे। दो कारण से—एक तो सुमेर के तत्त्वविदों को इस गहरे सूत्र का पता चल गया था कि मनुष्य के जगत में जो भी घटित होता है, उस घटना का प्रारंभिक स्रोत नक्षत्रों से किसी न किसी भांति सम्बन्धित है।
जीसस से छह हजार वर्ष पहले सुमेर में यह धारणा थी कि पृथ्वी पर जो भी बीमारी पैदा होती है, जो भी महामारी पैदा होती है, वह सब नक्षत्रों से सम्बन्धित है। अब तो इसके लिए वैज्ञानिक आधार भी मिल गए हैं। और जो लोग आज के विज्ञान को समझते हैं, वे कहते हैं कि सुमेर वासियों ने मनुष्य जाति का असली इतिहास प्रारंभ किया। इतिहासज्ञ कहते हैं कि सब तरह का इतिहास सुमेर से शुरू होता है।
वैज्ञानिक प्रमाण: अलेक्जेंडर चिज़ेव्स्की की खोज
उन्नीस सौ बीस में अलेक्जेंडर चिज़ेव्स्की (A. Chizhevsky) नाम के एक रूसी वैज्ञानिक ने इस बात की गहरी खोजबीन शुरू की और पाया कि सूरज पर हर ग्यारह वर्षों में एक बहुत बड़ा परिवर्तन होता है। सूर्य पर हर ग्यारह वर्ष में आणविक विस्फोट होता है। और चिज़ेव्स्की ने यह पाया कि जब भी सूर्य पर ग्यारह वर्षों में आणविक विस्फोट होता है, तभी पृथ्वी पर युद्ध और क्रांतियों के सूत्रपात होते हैं। और उसके अनुसार विगत सात सौ साल के लम्बे इतिहास में सूर्य पर जब भी कभी ऐसी घटना घटी है, तभी पृथ्वी पर दुर्घटनाएँ घटी हैं।
चिज़ेव्स्की ने इसका ऐसा वैज्ञानिक विश्लेषण किया था कि स्टालिन ने उसे उन्नीस सौ बीस में उठाकर जेल में डाल दिया था। स्टालिन के मरने के बाद ही चिज़ेव्स्की छूट सका। क्योंकि स्टालिन के लिए तो अजीब बात हो गयी। मार्क्स का और कम्युनिस्टों का खयाल है कि पृथ्वी पर जो क्रांतियां होती हैं, उनका मूल कारण मनुष्य-मनुष्य के बीच आर्थिक वैभिन्न (आर्थिक असमानता) है। और चिज़ेव्स्की कहता है कि क्रांतियों का कारण सूरज पर हुए विस्फोट हैं!
अब सूरज पर हुए विस्फोट और मनुष्य के जीवन की गरीबी और अमीरी का क्या संबंध? अगर चिज़ेव्स्की ठीक कहता है तो मार्क्स की सारी की सारी व्याख्या मिट्टी में चली जाती है। तब क्रांतियों का कारण वर्गीय नहीं रह जाता। तब क्रांतियों का कारण ज्योतिषीय हो जाता है। चिज़ेव्स्की को गलत तो सिद्ध नहीं किया जा सका क्योंकि सात सौ साल की जो गणना उसने दी थी, वह इतनी वैज्ञानिक थी और सूरज में हुए विस्फोटों के साथ इतना गहरा संबंध उसने पृथ्वी पर घटने वाली घटनाओं का स्थापित किया था कि उसे गलत सिद्ध करना तो कठिन था। लेकिन उसे साइबेरिया की जेल में डाल देना आसान था। स्टालिन के मर जाने के बाद ही ख्रुश्चेव उसे साइबेरिया से मुक्त कर पाया। इस आदमी के जीवन के कीमती पचास साल साइबेरिया में नष्ट हुए। छूटने के बाद भी वह चार-छह महीने से ज्यादा जीवित नहीं रह सका। लेकिन छह महीने में भी वह अपनी स्थापना के लिए और नये प्रमाण इकट्ठे कर गया। पृथ्वी पर जितनी महामारियाँ फैलती हैं, उन सबका संबंध भी वह सूरज से जोड़ गया है।
सूरज, जैसा हम साधारणतः सोचते हैं, ऐसा कोई निष्क्रिय अग्नि का गोला नहीं है, वरन अत्यन्त सक्रिय और जीवन्त अग्नि संगठन है। और प्रतिपल सूरज की तरंगों में रूपांतरण होते रहते हैं। और सूरज की तरंगों का जरा सा रूपांतरण भी पृथ्वी के प्राणों को कंपित कर जाता है। इस पृथ्वी पर कुछ भी ऐसा घटित नहीं होता जो सूरज पर घटित हुए बिना घटित हो जाता है। जब सूर्य का ग्रहण होता है तो पक्षी जंगलों में गीत गाना चौबीस घण्टे पहले से ही बंद कर देते हैं। पूरे ग्रहण के समय तो सारी पृथ्वी मौन हो जाती है। पक्षी गीत बंद कर देते हैं और सारे जंगलों के जानवर भयभीत हो जाते हैं। किसी बड़ी आशंका से पीड़ित हो जाते हैं। बन्दर वृक्षों को छोड़कर नीचे आ जाते हैं। वे भीड़ लगा कर किसी सुरक्षा का उपाय करने लगते हैं। और एक आश्चर्य कि बन्दर तो निरन्तर बातचीत और शोर-गुल में लगे रहते हैं, सूर्य ग्रहण के वक्त इतने मौन हो जाते हैं जितने कि साधु और संन्यासी भी ध्यान में नहीं होते हैं।
पैरासेल्सस और ग्रहों का अंतर्संगीत
सुमेर में सबसे पहले यह ख्याल पैदा हुआ था। फिर उसके बाद पैरासेल्सस (Paracelsus) नाम के स्विस चिकित्सक ने इसकी पुनर्स्थापना की। उसने एक बहुत अनूठी मान्यता स्थापित की, और वह मान्यता आज नहीं तो कल समस्त चिकित्सा विज्ञान को बदलने वाली सिद्ध होगी। अब तक उस मान्यता पर बहुत जोर नहीं दिया गया है। क्योंकि ज्योतिष तिरस्कृत विषय है—सर्वाधिक पुराना, लेकिन सर्वाधिक तिरस्कृत, यद्यपि सर्वाधिक मान्य भी।
अभी फ्रांस में पिछले वर्ष गणना की गई तो सैंतालीस प्रतिशत लोग ज्योतिष में विश्वास करते हैं। अमरीका में पाँच हजार बड़े ज्योतिषी दिन रात काम में लगे रहते हैं और उनके पास इतने ग्राहक हैं कि वे पूरा काम भी निपटा नहीं पाते हैं। करोड़ों डॉलर अमरीका प्रति वर्ष ज्योतिषियों को चुकाता है। अन्दाज है कि सारी पृथ्वी पर कोई अठहत्तर प्रतिशत लोग ज्योतिष में विश्वास करते हैं। लेकिन वे अठहत्तर प्रतिशत लोग सामान्य हैं। वैज्ञानिक, विचारक, बुद्धिवादी ज्योतिष की बात सुनकर ही चौंक जाते हैं। सी. जी. जुंग (Carl Jung) ने कहा है कि तीस वर्षों से विश्वविद्यालयों के द्वार ज्योतिष के लिए बंद हैं, यद्यपि आनेवाले तीस वर्षों में ज्योतिष इन बंद दरवाज़ों को तोड़कर विश्वविद्यालयों में पुन: प्रवेश पाकर रहेगा। प्रवेश पाकर रहेगा इसलिए कि ज्योतिष के संबंध में जो-जो दावे किए गए थे उनको अब तक सिद्ध करने का उपाय नहीं था। लेकिन अब उनको सिद्ध करने का उपाय है।
पैरासेल्सस ने एक मान्यता को गति दी और वह मान्यता यह थी कि आदमी तभी बीमार होता है जब उसके और उसके जन्म के साथ जुड़े हुए नक्षत्रों के बीच का तारतम्य टूट जाता है। इसे थोड़ा समझ लेना जरूरी है। उससे बहुत पहले पाइथागोरस (Pythagoras) ने यूनान में, आज से कोई पच्चीस सौ वर्ष पूर्व, ईसा से छह सौ वर्ष पूर्व 'प्लॅनेटरी हार्मनी' (Planetary Harmony), ग्रहों के बीच एक संगीत का संबंध है—इसके संबंध में एक बहुत बड़े दर्शन को जन्म दिया था। और पाइथागोरस जब यह बात कह रहा था तब वह भारत और इजिप्ट इन दो मुल्कों की यात्रा करके वापस लौटा था। पाइथागोरस जब भारत से बुद्ध और महावीर के विचारों से तीव्रता से आप्लावित लौटा था, तो उसने भारत से लौटकर जो बातें कही हैं उसमें उसने महावीर और विशेषकर जैनों के संबंध में बहुत सी महत्वपूर्ण बातें कही हैं। (पाइथागोरस ने जैन दार्शनिकों को 'जैनोसोफिस्ट' कहा है। वे नग्न रहते हैं, यह बात भी उसने कही है।)
पाइथागोरस मानता था कि प्रत्येक नक्षत्र या प्रत्येक ग्रह या उपग्रह जब यात्रा करता है, अंतरिक्ष में, तो उसकी गति के कारण एक विशेष ध्वनि पैदा होती है। प्रत्येक नक्षत्र की गति विशेष ध्वनि पैदा करती है। और प्रत्येक नक्षत्र की अपनी व्यक्तिगत निजी ध्वनि है। और इन सारे नक्षत्रों की ध्वनियों का एक ताल-मेल है, जिसे वह विश्व की संगीतबद्धता (Harmony) कहता था। जब कोई मनुष्य जन्म लेता है तब उस जन्म के क्षण में इन नक्षत्रों के बीच जो संगीत की व्यवस्था होती है, वह उस मनुष्य के प्राथमिक, सरलतम, संवेदनशील चित्त पर अंकित हो जाती है। वही उसे जीवन भर स्वस्थ और अस्वस्थ करती है। जब भी वह अपने उस मौलिक जन्म के साथ पाई गई संगीत व्यवस्था के साथ ताल-मेल बना लेता है तो स्वस्थ हो जाता है। और जब उसका ताल-मेल उस मूल संगीत से छूट जाता है तो वह अस्वस्थ हो जाता है।
पैरासेल्सस ने इस संबंध में बड़ा महत्वपूर्ण काम किया है कि वह किसी मरीज को दवा नहीं देता था जब तक उसकी जन्म कुण्डली न देख ले। और बड़ी हैरानी की बात है कि पैरासेल्सस ने जन्म कुण्डलियां देखकर ऐसे मरीजों को ठीक किया जिनको लेकर अन्य चिकित्सक कठिनाई में पड़ गए थे और ठीक नहीं कर पा रहे थे। उसका कहना था, "जब तक मैं न जान लूं कि यह व्यक्ति किन नक्षत्रों की स्थिति में पैदा हुआ है तब तक इसके अंतर्संगीत के सूत्र को भी पकड़ना सम्भव नहीं है। और जब तक मैं यह न जान लूं कि इसके अंतर्संगीत की व्यवस्था क्या है तो इसे कैसे हम स्वस्थ करें?"
स्वास्थ्य का क्या अर्थ है? अगर साधारणतः हम चिकित्सक से पूछें कि स्वास्थ्य का क्या अर्थ है तो वह इतना ही कहेगा कि बीमारी का न होना। पर उसकी परिभाषा निगेटिव है, नकारात्मक है। स्वास्थ्य तो पाज़िटिव (Positive) चीज़ है, विधायक अवस्था है। घर में रहने वाले की परिभाषा मेहमान से करनी पड़े, यह बात अजीब है। स्वास्थ्य तो हम लेकर पैदा होते हैं, बीमारी उस पर आती है। पैरासेल्सस कहता था, जब तक हम तुम्हारे अन्तर्निहित संगीत को न जान लें—क्योंकि वही तुम्हारा स्वास्थ्य है—तब तक हम ज्यादा से ज्यादा तुम्हारी बीमारियों से तुम्हारा छुटकारा करवा सकते हैं। लेकिन हम एक बीमारी से तुम्हें छुड़ाएंगे और दूसरी बीमारी तो तत्काल पकड़ लेगी। असली बात तो यही थी कि तुम्हारा भीतरी संगीत स्थापित हो जाए।
ब्रह्म-रसायन (Cosmic Chemistry)
पैरासेल्सस को हुए तो कोई पाँच सौ वर्ष होते हैं। उसकी बात भी खो गई थी। लेकिन पिछले बीस वर्षों में दुनिया में ज्योतिष का पुन: आविर्भाव हुआ है। आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ नए विज्ञान पैदा हुए हैं। उन्नीस सौ पचास में एक नई साइंस का जन्म हुआ। उस साइंस का नाम है 'कॉस्मिक केमिस्ट्री' (Cosmic Chemistry - ब्रह्म-रसायन)। उसको जन्म देने वाला आदमी है—जियोर्जियो पिकाडी (Giorgio Piccardi)। यह आदमी इस सदी के कीमती से कीमती, थोड़े से आदमियों में एक है। इस आदमी ने वैज्ञानिक आधारों पर प्रयोगशालाओं में अनंत प्रयोग करके यह सिद्ध किया है कि जगत पूरा एक 'ऑर्गेनिक यूनिटी' (Organic Unity) है।
पूरा जगत एक शरीर है। अगर मेरी उँगली बीमार पड़ जाती है तो मेरा पूरा शरीर प्रभावित होता है। शरीर का अर्थ होता है टुकड़े अलग-अलग नहीं हैं, संयुक्त हैं, जीवन्त रूप से इकट्ठे हैं। अगर मेरी आँख में तकलीफ होती है तो मेरे पैर का अंगूठा भी उसे अनुभव करता है। कॉस्मिक केमिस्ट्री कहती है कि पूरा ब्रह्माण्ड एक शरीर है। उसमें कोई भी चीज अलग-अलग नहीं है, सब संयुक्त है। इसलिए कोई तारा कितनी ही दूर क्यों न हो, जब वह ज्यादा उत्तप्त होता है तब हमारे खून की धाराएं बदल जाती हैं।
पिछली बार जब सूरज पर अग्नि के विस्फोट चल रहे थे तो एक जापानी चिकित्सक तोमातो (Tomatso) बहुत हैरान हुआ। वह चिकित्सक स्त्रियों के खून पर निरन्तर काम कर रहा था बीस वर्षों से। स्त्रियों के खून की एक विशेषता है जो पुरुषों के खून की नहीं है। उनके मासिक धर्म के समय उनका खून पतला हो जाता है और पुरुष का खून पूरे समय एक-सा रहता है। लेकिन जब सूरज पर बहुत जोर से तूफ़ान चल रहे थे, तब वह चकित हुआ कि पुरुषों का खून भी पतला हो जाता है! जब सूरज पर आणविक तूफान चलता है, तब पुरुष का खून भी पतला हो जाता है। यह बड़ी नई घटना थी। अगर खून पर प्रभाव पड़ सकता है तो फिर किसी भी चीज पर प्रभाव पड़ सकता है।
एक दूसरे अमरीकन विचारक हैं फ्रैंक ब्राउन (Frank Brown)। वह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुविधाएं जुटाने का काम करते रहे हैं। यह माना जाता था कि दो सौ मील के बाद अंतरिक्ष शून्य है, वहां कुछ है ही नहीं। लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों की खोज ने सिद्ध किया कि अंतरिक्ष शून्य नहीं है, बहुत भरा हुआ है। सच तो यह है कि पृथ्वी की दो सौ मील की हवाओं की परतें सारे बाहरी प्रभावों को हम तक आने से रोकती हैं। अंतरिक्ष में तो अद्भुत प्रवाहों की धाराएं बहती रहती हैं—उसको आदमी सह पायेगा या नहीं। ब्राउन ने अंतरिक्ष में आलू भेजे। क्योंकि उनका कहना था कि आलू और आदमी में बहुत भीतरी फर्क नहीं। अगर आलू सड़ जाएगा तो आदमी भी नहीं बच सकेगा। इसमें एक हैरानी की बात ब्राउन ने सिद्ध की कि आलू या कोई भी बीज जो जमीन के भीतर पड़ा हुआ बढ़ता है, वह सूरज के ही संबंध में बढ़ता है। सूरज ही उसे जगाता, उठाता है और ऊपर पुकारता है।
प्लॅनेटरी हेरिडिटी (Planetary Heredity)
ब्राउन एक दूसरे शास्त्र का भी अन्वेषक है, जिसे 'प्लॅनेटरी हेरिडिटी' (उपग्रही वंशानुक्रम) कहते हैं। अंग्रेजी में शब्द है 'होरोस्कोप' (Horoscope)। यह यूनानी 'होरोस्कोपस' (Horoscopus) का रूप है। होरोस्कोपस का अर्थ होता है—"मैं देखता हूं जन्मते हुए ग्रह को।" जब एक बच्चा पैदा होता है तब उसी समय पृथ्वी के चारों ओर, क्षितिज पर अनेक नक्षत्र जन्म लेते हैं, उठते हैं। जैसे सूरज सुबह उगता है और सांझ डूबता है, ऐसे ही चौबीस घण्टे अंतरिक्ष में नक्षत्र उगते और डूबते हैं।
अब तक ऐसा समझा जाता था कि चाँद-तारों से आदमी के जन्म का क्या लेना-देना? तीन सौ वर्षों से यह तर्क दिये जा रहे हैं कि कोई संबंध नक्षत्रों से व्यक्ति के जन्म का नहीं है। लेकिन ब्राउन और पिकाडी जैसे वैज्ञानिकों की खोज का एक अद्भुत परिणाम हुआ है और वह यह कि जीवन निश्चित रूप से प्रभावित होता है। और अगर जीवन प्रभावित होता है तो हमारी खोज जैसे-जैसे सूक्ष्म होगी वैसे-वैसे हम पाएंगे कि व्यक्ति भी प्रभावित होता है।
एक छोटे बच्चे के जन्म के समय उसके चित्त की स्थिति ठीक वैसी ही होती है जैसे बहुत सेंसिटिव (Sensitive) फोटो-प्लेट की। जुड़वाँ बच्चों को समझने की थोड़ी कोशिश करें। एक अंडे से जो दो बच्चे पैदा होते हैं, उनके गर्भाधान का क्षण एक ही होता है और उनके जन्म का क्षण भी एक होता है। एक अंडे से पैदा हुए दो बच्चों का आई-क्यू (IQ), उनका बुद्धि माप करीब-करीब बराबर होता है। अगर एक अंडे से पैदा हुए दो बच्चों को बिल्कुल अलग-अलग पाला जाए—एक को हिंदुस्तान में और एक को चीन में—तो भी उनके बुद्धि-अंक में कोई फर्क नहीं पड़ता। चीन में जो बच्चा है, जब उसको जुकाम होगा, तब जो भारत में बच्चा है उसको भी जुकाम होगा। वे एक ही साल में मरते हैं, ज्यादा से ज्यादा उनकी मृत्यु में तीन महीने का फर्क होता है।
हमारी चमड़ियाँ अलग-अलग हैं, इंडिविजुअल हैं। अगर मेरा हाथ टूट जाए तो आपकी चमड़ी मेरे हाथ पर काम नहीं आएगी, शरीर उसे इनकार कर देगा। वैज्ञानिक जिसे नहीं पहचान पाते, मेरा शरीर उसे पहचान लेता है। लेकिन एक ही अंडे से पैदा हुए दो बच्चों की चमड़ी ट्रांसप्लांट (Transplant) हो सकती है, शरीर इनकार नहीं करेगा। क्या जन्म का क्षण इतना महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है? ज्योतिष कहता रहा है कि जन्म का क्षण सर्वाधिक प्रभावी है।
जल की संवेदनशीलता और ब्रह्मांडीय प्रभाव
हम जानते हैं कि चाँद से समुद्र प्रभावित होता है। लेकिन हमें ख्याल नहीं है कि समुद्र में पानी और नमक का जो अनुपात है, वही आदमी के शरीर में पानी और नमक का अनुपात है। आदमी के शरीर में पैंसठ प्रतिशत पानी है। अगर समुद्र का पानी चाँद से प्रभावित होता है, तो आदमी के शरीर के भीतर का पानी क्यों प्रभावित नहीं होगा? पूर्णिमा के निकट आते-आते सारी दुनिया में पागलपन की संख्या बढ़ती है। अमावस के दिन दुनिया में सबसे कम लोग पागल होते हैं। अंग्रेजी में शब्द है—ल्यूनाटिक (Lunatic), जिसका मतलब है "चाँद मारा"। हिंदी में भी पागल के लिए 'चाँद मारा' शब्द है।
जगत से, अंतरिक्ष से तारों का जो भी प्रभाव आदमी तक पहुंचता है उसका मीडियम, माध्यम 'पानी' है। आदमी के शरीर के जल को ही प्रभावित करके कोई भी रेडिएशन मनुष्य में प्रवेश करता है। सर्वाधिक रहस्यमय गुण जो जल का है, वह यह है कि सर्वाधिक संवेदनशीलता जल के पास है। माँ के पेट में बच्चा जब तैरता है, तब भी वह ठीक ऐसे ही तैरता है जैसे सागर के जल में। माँ और उसके पेट में बनने वाले गर्भ का कोई सीधा संबंध नहीं होता, दोनों के बीच में जल होता है और माँ से जो भी प्रभाव बच्चे तक पहुँचते हैं वह जल के माध्यम से ही पहुँचते हैं।
भविष्य का दर्शन: टाइम ट्रैक (Time Track)
विज्ञान चूँकि मूलतः अतीत की तलाश है—विज्ञान इसी बात की खोज है कि 'कारण' (Cause) क्या है। ज्योतिष इसी बात की खोज है कि 'परिणाम' (Effect) क्या होगा। ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक चिंतन है। वह यह कहता है कि भविष्य हमारा अज्ञान है इसलिए भविष्य है। अगर हमें ज्ञान हो तो भविष्य जैसी कोई घटना नहीं है; वह अभी भी कहीं मौजूद है।
महावीर कहते थे, "जो हो रहा है, वह एक अर्थ में हो ही गया।" अगर आप चल पड़े तो एक अर्थ में पहुँच ही गए। हम सदा अतीत से देखते हैं—कली फूल बनेगी। ज्योतिष का मानना है कि अतीत धक्का दे रहा है और भविष्य खींच रहा है। पूरा भविष्य आह्वान दे रहा है कि 'खुल जाओ'। अतीत और भविष्य दोनों के दबाव में कली फूल बनेगी।
रॉन हब्बार्ड (L. Ron Hubbard) ने एक नयी खोज पश्चिम में शुरू की है—पूरब के लिए तो बहुत पुरानी है। वह खोज है—'टाइम ट्रैक' (Time Track)। हब्बार्ड का ख्याल है कि प्रत्येक व्यक्ति जहाँ भी जिया है इस पृथ्वी पर या अनंत यात्रा में—समय की पूरी की पूरी धारा उसके भीतर अभी भी संरक्षित है। हब्बार्ड ने कहा है कि आदमी के भीतर इनग्राम (Engram) हैं। एक तो हमारे पास स्मृति है जिससे हम याद रखते हैं, और उससे गहरी एक स्मृति है जो हमारे जीवन के समस्त अनुभवों का सार है। उसे खोला जा सकता है और जब उसे खोला जाता है तो महावीर उसे 'जाति-स्मरण' कहते हैं, हब्बार्ड उसे 'टाइम ट्रैक' कहता है—पीछे लौटना समय में। सौ में से सत्तर बीमारियां टाइम ट्रैक पर आधारित हैं, जो हमें पीछे लौट कर ले जाती हैं।
ज्योतिष सिर्फ नक्षत्रों का अध्ययन नहीं है। ज्योतिष मनुष्य के भविष्य को टटोलने की चेष्टा है। उसे पकड़ने के लिए अतीत को पकड़ना ज़रूरी है। जब से ज्योतिषी सिर्फ़ शरीर के बाहरी चिह्नों पर अटक गए हैं, तब से ज्योतिष की गहराई खो गई है। असली गहराई भीतर के चक्रों और ऊर्जा में छिपी है। प्रकृति एक-एक आदमी को अलग-अलग ढंग का अंगूठा दे सकती है, इतनी विशिष्टता दे पाती है, तो एक-एक व्यक्ति को आत्मा और जीवन विशिष्ट न दे पाए, इसका कोई कारण नहीं मालूम होता।
ज्योतिष बहुत बातों की खोज थी। उसमें जो अनिवार्य है, उसके साथ सहयोग—वह जो होने ही वाला है, उसके साथ व्यर्थ का संघर्ष नहीं। जो नहीं होने वाला है उसकी व्यर्थ की मांग नहीं। ज्योतिष मनुष्य को धार्मिक बनाने के लिए, 'तथाता' में ले जाने के लिए, परम स्वीकार में ले जाने के लिए एक उपाय था। इसके बहु-आयाम हैं।
जगत एक जीवंत शरीर है, ऑर्गेनिक यूनिटी है—उसमें कुछ भी अलग-अलग नहीं है—सब संयुक्त है। दूर से दूर जो है वह भी निकट से निकट जुड़ा है। इसलिए कोई इस भ्रांति में न रहे कि वह एक अलग-थलग द्वीप है। हम पूरे समय एक दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं और एक दूसरे से प्रभावित हो रहे हैं। यह एकात्म का बोध अगर ख्याल में आए तो ही ज्योतिष समझ में आ सकता है, अन्यथा ज्योतिष समझ में नहीं आ सकता।
हमारा उद्देश्य यहाँ ज्योतिष के किसी भी मत का खंडन या पुष्टि करना कतई नहीं है। पाठक अपने विवेक के अनुसार सहमत या असहमत हो सकते हैं।