मुहूर्त
शुभ समय
पारंपरिक पंचांग आधारित समय का उपयोग करके महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए सही क्षण चुनें।
मुहूर्त क्या है?
मुहूर्त महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए शुभ समय खिड़कियां चुनने की वैदिक विज्ञान है। जैसे किसान सही मौसम में बीज बोता है, वैदिक परंपरा मानती है कि सही समय पर महत्वपूर्ण क्रियाएं शुरू करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
मुहूर्त चयन पंचांग तत्वों पर विचार करता है — तिथि (चंद्र दिवस), नक्षत्र (तारा), योग, करण और वार (सप्ताह का दिन) — साथ ही ग्रह स्थितियों और गोचरों के साथ। इसका उद्देश्य आपकी क्रिया को अनुकूल ब्रह्मांडीय स्थितियों के साथ संरेखित करना है।
शादियों, गृह प्रवेश, व्यवसाय शुरुआत, शिक्षा शुरू करने, संपत्ति खरीदने, वाहन खरीदने और धार्मिक समारोहों जैसी सामान्य घटनाओं के लिए मुहूर्त पर सलाह दी जाती है।
मुहूर्त के प्रकार
- अमृत मुहूर्त — नई शुरुआत और महत्वपूर्ण उद्यमों के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
- शुभ मुहूर्त — अधिकांश सकारात्मक गतिविधियों के लिए उपयुक्त सामान्य शुभ खिड़कियां।
- लाभ मुहूर्त — वित्तीय लेनदेन, खरीद और व्यापार गतिविधियों के लिए अनुकूल।
- चर मुहूर्त — दिनचर्या के कार्यों के लिए उपयोगी क्षणभंगुर शुभ क्षण।
- मुहूर्त राहु काल, यमघंटक और अन्य अशुभ अवधियों से बचता है जो घटना के उद्देश्य को बिगाड़ सकती हैं।
पुराना मुहूर्त कैटलॉग
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पंचांग की विषय-सूची
- तिथियों के नाम
- तिथियों के प्रकार
- दग्ध संज्ञक तिथियाँ
- विष संज्ञक तिथियाँ
- हुताशन संज्ञक तिथियाँ
- नक्षत्रों के नाम व संख्या
- अभिजित नक्षत्र
- पंचक विचार
- मूल संज्ञक
- ताराओं के नाम
- योग
- योगों के नाम
- योगचक्र
- निन्द्ययोग
- करण
- करणों के नाम
- करणों के स्वामी
- शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक का करण
- कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक का करण
- करणों की शुभाशुभता
- भद्रा
- भद्रा वास
- भद्रा मुख और पुच्छ
- अयन
- उत्तरायण
- दक्षिणायण
- सामान्यतया सभी कार्यों में लग्न शुद्धि
- सामान्य दिन शुद्धि
- चौघड़िया मुहूर्त
- राहुकाल
- कार्यसिद्धि के लिए होरा मुहूर्त
- किस होरा में कौन सा कार्य करें
योग विचार
- योग विचार
- सर्वार्थसिद्धि योग
- सिद्धि योग
- वार-नक्षत्र जनित अमृत योग
- तिथि-वार जनित अमृत योग
- रविपुष्य योग
- गुरुपुष्य योग
- राज्यप्रद योग
- रवि योग
- प्रशस्त योग
- अभिजित मुहूर्त
- त्रिपुष्कर योग
- द्विपुष्कर योग
- मृत्यु योग
- काल योग
- दग्ध योग
- विष योग
- हुताशन योग
- यमघण्ट योग
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग में पाँच अंग होते हैं — तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। इन्हीं के आधार पर शुभ समय निश्चित किया जाता है। इन पाँचों का परिचय और इन्हीं पाँचों के आपस में मिलने से अनेक शुभ अथवा अशुभ फल देने वाले समय प्राप्त होते हैं, उनका ज्ञान रखना परम आवश्यक है। समय के शुभाशुभ ज्ञान के द्वारा मुहूर्त निकाला जाता है।
सामान्य मुहूर्त
मुहूर्त दो प्रकार के होते हैं — एक सामान्य। जिस मुहूर्त में तिथि, वार, नक्षत्रादि का विचार न किया जाए उसे सामान्य मुहूर्त कहते हैं। उदाहरण — चौघड़िया, अभिजित् आदि।
विशिष्ट मुहूर्त
दूसरा विशिष्ट मुहूर्त। जिस मुहूर्त में जातक के राशि-नक्षत्रानुसार तिथि, वार, नक्षत्रादि का विचार किया जाए, उसे विशिष्ट मुहूर्त कहते हैं। उदाहरण — विवाह, सेवा करण, वाहन क्रय आदि।
मुहूर्त चयन हमारी दैनिक गणनाओं के समाए DE440 पंचांग इंजन का उपयोग करता है।
